सरकारी स्कूलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल शिक्षा
शुरुआती स्तर से ही नए तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिनमें पज़ल और खेलों का नियमित उपयोग शामिल है ताकि गणित के बारे में सोचने का तरीका मज़ेदार एवं रोचक बने।
एनईपी 2020 के पैरा नंबर 4.25 में यह भी सुझाव दिया गया है कि 'माना जाता है कि भारत के भविष्य और भविष्य के कई ऐसे क्षेत्रों एवं पेशों में देश की नेतृत्व वाली भूमिका के लिए गणित एवं गणितीय सोच बहुत महत्वपूर्ण होगी, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और डेटा विज्ञान आदि शामिल हैं।' इसलिए, स्कूली शिक्षा के दौरान गणित एवं कंप्यूटेशनल थिंकिंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
शुरुआती स्तर से ही नए तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिनमें पज़ल और खेलों का नियमित उपयोग शामिल है ताकि गणित के बारे में सोचने का तरीका मज़ेदार एवं रोचक बने। मध्य स्तर में कोडिंग से जुड़ी गतिविधियां शामिल की जाएंगी।
स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ एसई ) 2023 इस बात पर बल देती है कि ' छात्रों और समाज के लिए गणित की शिक्षा वैश्विक स्तर पर पहले कभी इतनी महत्वपूर्ण नहीं रही है।

गणित और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डेटा विज्ञान, जलवायु मॉडलिंग, अवसंरचना विकास और भारत एवं अन्य सभी देशों के सामने मौजूद कई अन्य संबंधित वैज्ञानिक मुद्दों के बीच गहरा संबंध है।
यही कारण है कि गणित स्कूली शिक्षा का बहुत अहम हिस्सा बन गया है।
इसके अलावा, इसमें यह भी कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, और बिग डेटा विश्लेषण एवं विज़ुअलाइज़ेशन जैसी तकनीकों का शिक्षा के क्षेत्र में निश्चित रूप से नए एवं अनोखे तरीके से इस्तेमाल होगा।
