ग्रामीण विकास मंत्रालय प्रवासन संबंधी अध्ययन
इस कार्यक्रम में आजीविका अवसंरचना पर एक समर्पित विषयगत क्षेत्र शामिल है, जिसमें कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां, ग्रामीण उद्यम, स्वयं सहायता समूह और अन्य आय-सृजन गतिविधियां शामिल हैं।
तथापि, अन्य बातों के साथ-साथ ग्रामीणों के प्रवासन से संबंधित समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने एक बहु-आयामी कार्रवाई अपनाई है, जैसे कि बेहतर अवसंरचनात्मक सुविधाओं (जैसे सड़कें, पेयजल आपूर्ति, आवास, स्वच्छता एवं संपर्कता) का प्रावधान, क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने हेतु संसाधनों का न्यायसंगत वितरण, रोजगार सृजन, कौशल प्रदान करना, उद्यमशीलता गतिविधि को प्रोत्साहित करना और वित्तीय सहायता एवं ऋण सुविधाओं तक आसान पहुंच प्रदान करना आदि।
सरकार निर्धारित उद्देश्यों की प्रभावी प्राप्ति सुनिश्चित करने की दिशा में ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की प्रगति का नियमित आकलन एवं समीक्षा करती है।
मनरेगा योजना, वाई-एनआरएलएम और पीएमएवाई-जी के अंतर्गत क्रमशः सृजित श्रम-दिवसों, गठित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और पूर्ण किए गए आवासों का ब्यौरा नीचे दिया गया है:- कार्यक्रम का नाम प्राप्त प्रमुख लाभ मनरेगा योजना वर्ष 2006 में कार्यक्रम की शुरूआत के बाद से 30.06.2026 तक कुल 4994.17 करोड़ श्रम-दिवस सृजित किए गए हैं वाई-एनआरएलएम वर्ष 2011 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत 30.06.2026 तक कुल 10.08 करोड़ महिलाओं को 92 लाख स्वयं सहायता समूहों में शामिल किया गया है पीएमएवाई-जी वर्ष 2016 से अब तक कुल 3.11 करोड़ आवास पूर्ण किए जा चुके हैं विकसित भारत - रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025, दिनांक 01 जुलाई, 2026 से प्रभावी हुआ, जो प्रत्येक इच्छुक ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की सांविधिक गारंटी प्रदान करता है तथा टिकाऊ परिसंपत्तियों के सृजन एवं संवहनीय ग्रामीण आजीविकाओं को सुदृढ़ करने पर बल देता है।

