अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और APAAR से डिजिटल शिक्षा में बड़ा बदलाव
भारत का फैशन और परिधान उद्योग एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजरते हुए अपनी पारंपरिक विनिर्माण क्षमता से आगे बढ़कर डिज़ाइन नवाचार, उच्च गुणवत्ता और सांस्कृतिक विशिष्टता के लिए।
भारत का फैशन और परिधान उद्योग एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजरते हुए अपनी पारंपरिक विनिर्माण क्षमता से आगे बढ़कर डिज़ाइन नवाचार, उच्च गुणवत्ता और सांस्कृतिक विशिष्टता के लिए वैश्विक पहचान बना रहा है।
वर्ष 2025-26 में भारत का कपड़ा एवं परिधान निर्यात लगभग 3.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने और उसे वर्ष 2030 तक 9 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित करने, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बढ़ते नेटवर्क से भारत की प्रमुख वैश्विक बाजारों तक पहुंच के साथ सत्र में इस बात पर चर्चा की गई कि भारतीय ब्रांड किस प्रकार मजबूत ब्रांड पहचान विकसित कर, व्यवसाय करने की रणनीति (ओम्नीचैनल) क्षमताओं का विस्तार करते हुए तथा बदलती उपभोक्ता और नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालकर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को दीर्घकालिक वैश्विक विकास में बदल सकते हैं।

