विकसित भारत 2047 के लिए भविष्य के अनुरूप शिक्षा प्रणाली के निर्माण में केंद्र और राज्य समान भागीदार
पंकज केपी श्रेयस्कर ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शैक्षिक संकेतकों की स्थिति पर प्रस्तुतियाँ दीं।
वे नई दिल्ली स्थित आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी) में शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) की केंद्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे।
अपने संबोधन में श्री प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सहयोग को मजबूत करने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के दृष्टिकोण के अनुरूप केंद्र प्रायोजित योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए एक मूल्यवान मंच प्रदान करता है।
श्री प्रधान ने समग्र शिक्षा, पीएम श्री, निपुण भारत, पीएम पोषण और उल्लास जैसी पहलों के माध्यम से स्कूली शिक्षा में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को मजबूत करने, शिक्षकों को सशक्त बनाने, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाने, नवाचार को बढ़ावा देने और 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में प्रत्येक शिक्षार्थी के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करते रहें।

